I WISH

“I wish”- such a common word but still unheard.
Do I need to subside all my wishes deep somewhere
Or I need to travel to some place or may be my destiny is nowhere.
Forever and ever, will I be the same.
For how long excuses are going to be lame.
Tears rolled down the cheeks seeking for an answer,
May be my questions are rock but they do hope for answers.
Is it “ME, the one I knew or its “YOU” in me,
“I wish is me” or “I wish is You”

 

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Dhoop-Chaaon

जाड़े की दोपहर  मैं छत पर गुनगुनी धूप सरला के नर्म गालों पर थपकिया दे रही थी की उसे मीठी नींद आने लगी थी | अचानक से गली मे खेलते बच्चो की गेंद उसके पेरो से आ टकराई और उसकी नींद मे ख़लल डाल दिया | क्रोध से तमतमाई गली मे खेलते  बच्चो को पढाई करने का ताना देने  ही लगी थी की उसकी नज़र गली के कोने मे खड़े मैले कुचेले कपडे पहने  अधेड़ उम्र के आदमी पे पड़ी | वह उसकी बेटी “नन्ही” को अनवरत घूरे जा रहा था | इस नजर की हैवानियत को सरला तुरंत ही भांप गयी और अपनी नन्ही की सुरक्षा  को तड़प उठी | जल्दी से नीचे उतर कर अपनी नन्ही को ममता के आँचल मे लेकर उसने सकून की साँस ली | किन्तु वर्तमान मे हुए निर्भया और आसिफ़ा  काण्ड की खबरे उसके मन को विचलित कर गयी थी | अनिष्ठ की आशंका मात्र से  ही वो संज्ञाशून्य हो चुकी थी | एक ही विचार उसको बार बार परेशान कर रहा था |

आंखिर कब तक मे नन्ही को अपने आँचल मे समेत पाऊँगी | क्या कही भी वो सुरक्षित न रह पाएगी | इस डर के चलते क्या हम अपनी बच्चियों को घर की चार दिवारी मे कैद रखेंगे | कल को क्या होगा जब वो काम के चलते पूरे पूरे दिन घर से बाहर रहेगी | ये मानवरूपी वेह्शी दरिन्दे मेरी फूल सी नाजुक बच्ची को आखिर कब तक घूरेंगे | मै पूरी उम्र तो इसका ख्याल ना रख पाऊँगी | क्या ऐसे समाज का निर्माण करना नामुमकिन  हो चला है,  जहां औरते खुद को महफूज़ महसूस कर सके | यह कुछ सवाल मेरे ही नहीं,  आज हर एक माँ के हो सकते है | क्या ये सब इक अनुत्तरित प्रशन बन कर रह जाएँगे |

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